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साहिब कांशीराम जी के अनमोल विचार

BAMCEF-DS4-BSP के संस्थापक

साहिब कांशीराम जी के अनमोल विचार

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1. कभी भी किसी भी व्यक्ति के पीछे भागना नहीं चाहिए। विचारधारा का पालन करना चाहिए। व्यक्ति भाग     सकता है विचार नहीं ।

2. हमारी लड़ाई 15/85 की लड़ाई है।

3. मुर्दा लोग भाग नहीं लेते मिशन में  ! और लक्ष्य को रुकने नहीं देते जिंदा लोग !!

4. जगाया तो सिर्फ उन्हीं लोगो को जाता है जो लोग जिंदा होते हैं। मुर्दों को तो कब्रिस्तानों में जलाया और दफनाया   जाता है।

5. हमारे जीवन का उद्देश्य समाज को 6743 जातियों में बांटना बिलकुल भी नहीं है जो हमारा समाज 6743  जातियों  में बांटा हुआ है। हमारा उद्देश्य उनको एक करना होना चाहिए।

6.मतदान का अधिकार  हमें बिकने के लिए नहीं मिला है बल्कि गुलामी से बाहर निकलने और हर पांच वर्ष में   अपना नया राजा चुनने के लिए मिला है।

7.मनुवाद ही एक ऐसा अध्याय है जो हमारी मुश्किलों के लिए जिम्मेदार है इसी मनु ने हमारी जाति को नीच बताया है।

आइये हम इस ना बराबरी की रूह मनुवाद को जड़ से उखाड़ कर फेंक दें।


8.ये धर्म और जातियां हमने नहीं बनाई है,ये हम पर जबरन लादी गई हैं। हम तो इनसे छुटकारा पा लेना चाहते हैं  क्योंकि हम धर्म और जाति व्यवस्था के शिकार हैं।

9.अगर हम जिंदगी में  कभी पीछे रह गए तो इसके पहले दोषी हम खुद हैं, कोई दूसरा व्यक्ति या धर्म बाद में।

10. सिखों के साथ कुछ वर्षो से धोखा हो रहा है  मुस्लिम भाइयो के साथ 40 वर्षो से। और दलितों के साथ 4000 वर्षो से धोखा हो रहा है, अगर हम सभी एक हो जाये तो इस धोखे से बनी  दीवार को हम आसानी तोड़ सकते है, 
और हम इस जुल्मी राज से आजादी पा सकते हैं। 

11. जो कौम सिरताज नहीं होती है, उनके घर परिवार की बहन व बेटियां कभी सुरक्षित नहीं होती है।

12. जिनको जवानी में दुसरो की चापलूसी की लत लग जाती है ना तो उनका सारा जीवन दलाली में ही निकल जाता है।

13. जितना समय हम दूसरों में गलतियां गिनाने में लगाते है, अगर हम उतना ही समय अपनी गलतियां सुधारने में लगायें, तो हम बडी़ शीघ्रता से तरक्की करेंगे लगेंगे !

14. जब आप अपनी मंजिल की तरफ आगे बढ़ेंगे तो आपके रास्ते में तीन रुकावटें आएंगी  मीडिया, मनी, माफिया अगर हम इन तीनों रुकावटओं से बचते बचते अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते गए तो हमको जीतने से कोई नहीं रोक सकता ।


हमारी लड़ाई ब्राह्मण से ना होकर, ब्राह्मणवाद से है

 
मा० कांशीराम 

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